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अभी अभी MP भाजपा में आया बड़ा भू-चाल, CM शिवराज और सिंधिया…….😱

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मध्य प्रदेश में हाल में हुए उपचुनाव से पहले यह अनुमान लगाये जा रहे थे कि यदि चु’नाव में भाजपा की जीत होती है तो आगे राज्य में शि’वराज और सिंधिया की जोड़ी भाजपा की धुरी रहेंगे। मध्य प्रदेश की सि’या’सत की दिशा भी  इन्हीं दोनों दि’ग्गजों के अनुसार तय होगी, किन्तु चु’नाव बाद स्थिति बि’ल्कुल उ’लट लग रही है। सत्ता और पा’र्टी दोनों की चाबी सं’गठन ने अपने हाथ में ले रखी है।

कमलनाथ की कांग्रेस सरकार को हटा’ने के बाद जब दोबार भा’जपा की सरकार बनी उसके बाद से ही सं’गठन ने कमा’न अपने हाथ में ले रखी है। शि’वरा’ज सिंह को मु’ख्यमं’त्री तो बना दिया किन्तु मंत्रिमंडल गठ’न करने को लेकर उनके हाथ बधे रहे। उपचु’नावों को देखते हुए सिंधिया खे’में के लोगों को मंत्री जरूर बनाया गया लेकिन भाजपा से संगठ’न की पसंद के लोगों को ही जगह मिली।

उपचुनावों  की महत्ता को देखते हुए संगठन ने शिवराज को सत्ता संचालन को लेकर पूरी छूट दी। सरकार में उसकी ओर से किसी भी तरह का हस्ताक्षेप नहीं किया गया। यह अनुमान लगाये जा रहे थे कि उपचुनाव के परिणाम भाजपा के पक्ष में आने के बाद शिवराज और सिंधिया दोनों और मजबूत हो जायेंगे लेकिन ह’कीक’त बिल्कुल इसके उलट दिख रही है।

दो मंत्रियों द्वारा चुनाव पूर्व त्यागपत्र देने तथा कुछ मंत्रियों के चुना’व हारने के बाद मं’त्रिमं’डल में पांच जगह खाली हुई है। इसमें ये सभी पद सिंधिया खेमे के मंत्रियों के थे। सिंधिया की ओर से मांग है कि ये सभी पद उनके समर्थन वाले विधायकों को वापस दिये जाये तथा दो हारने वाले मंत्री इमरती देवी और गिरिराज दंडोतिया को निगम -मंडल में नियुक्ति दी जाये। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इस बात लेकर सहमत थे किन्तु संगठन ने साफ इंकार कर दिया है।  मंत्रिमंडल विस्तार में त्याग पत्र देने वाले गोविंद सिंह राजपूत और तुलसी सिलावट को ही स्थान मिलने की संभावना है। इसके अलावा हार’ने वालों को निगम-मंडल में नियुक्तियों की सिंधिया की मांग को भी संगठन मानने को तैयार नहीं है।  भाजपा संगठन ने संकेत दिया है कि हारने वाले मंत्रियों की जगह भाजपा के मंत्री बनाये जायेंगे। यह नाम भी भाजपा संगठन ही तय करेगा जिसमें नये चेहरों को शामिल किया जायेगा। लंबे समय तक मंत्री रह चुके लोगों को फिर मंत्रिमंडल में स्थान नहीं दिया जायेगा।  इसके अलावा प्रदेश के निगम मंडलों में भी बड़ी संख्या में नियुक्तियां होनी है। इसमें भी केवल और केवल संगठन की चलने के आसार है। संगठन ने कहा है कि जिन लोगों ने जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाने के लिए काम किया है उन्हीं को इनमें स्थान दिया जायेगा। यहां भी वही फार्मूला लागू होगा कि जिन लोगों को पहले इस तरह की नियुक्तियां मिल चुकी है, उनको मौका नहीं दिया जायेगा।

इसके बाद भी उनकी लो’कप्रिय’ता इतनी ज्यादा है कि दूसरा कोई नेता इस मा’मले में उनके आस-पास भी नहीं है। इसको देखते हुए अब पार्टी संगठन ने उनके विकल्प त’लाश शुरू कर दी है, जिससे समय आने पर राज्य को नया नेतृत्व प्रदान किया जा सके।