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शुक्र’वार का य’ह प्र’योग खो’ल दे’गा आप’की कि’स्मत का ता’ला, जा’निए कै’से?

धार्मिक खबर

ला’ल किता’ब में बहु’त ही आ’सान, स’स्ते औ’र सटी’क उपा’य ब’ताए ग’ए हैं, जै’से कि य’दि आ’पको लग’ता है कि मे’रा भा’ग्य मु’झसे रू’ठा हु’आ है जिस’के का’रण नौक’री, क’रियर या का’रोबार में परे’शानी आ र’ही है तो य’हां प्रस्तु’त है आ’सान उपा’य…

स’बसे पह’ले आ’प ता’ले की दुका’न प’र कि’सी भी शुक्रवा’र को जा’एं औ’र ए’क स्टी’ल या लो’हे का ता’ला खरी’द लें। लेकि’न ध्या’न र’खें ता’ला बं’द हो’ना चा’हिए खु’ला ता’ला न’हीं। ता’ला खरी’दते स’मय उ’से न दुका’नदार को खो’लने दें औ’र न आ’प खु’द खो’लें। ता’ला स’ही है या न’हीं य’ह जां’चने के लि’ए भी न खो’लें। ब’स बं’द ता’ले को खरीद’कर ले आ’एं।

उ’से ता’ले को ए’क डि’ब्बे में र’खें औ’र शुक्र’वार की रा’त को ही अप’ने सो’ने वा’ले क’मरे में बि’स्तर के पा’स र’ख लें। शनि’वार सु’बह उठक’र स्ना’न आ’दि से नि’वृत्त हो’कर ता’ले को बि’ना खो’ले कि’सी मं’दिर या देवस्था’न प’र र’ख दें। ता’ले को रख’कर बि’ना कु’छ बो’ले, बि’ना प’लटें वा’पिस अप’ने घ’र आ जा’ए।

विश्वा’स औ’र श्र’द्धा र’खें जै’से ही को’ई उ’स ता’ले को खोले’गा आ’पकी कि’स्मत का ता’ला भी खु’ल जाए’गा। य’ह जा’ना-मा’ना प्र’योग है अ’पनी किस्म’त चम’काने के लि’ए इ’से अ’वश्य आज’माएं….

ला’ल किता’ब में बहु’त ही आ’सान, स’स्ते औ’र सटी’क उपा’य ब’ताए ग’ए हैं, जै’से कि य’दि आ’पको लग’ता है कि मे’रा भा’ग्य मु’झसे रू’ठा हु’आ है जिस’के का’रण नौक’री, क’रियर या का’रोबार में परे’शानी आ र’ही है तो य’हां प्रस्तु’त है आ’सान उपा’य…

स’बसे पह’ले आ’प ता’ले की दुका’न प’र कि’सी भी शुक्रवा’र को जा’एं औ’र ए’क स्टी’ल या लो’हे का ता’ला खरी’द लें। लेकि’न ध्या’न र’खें ता’ला बं’द हो’ना चा’हिए खु’ला ता’ला न’हीं। ता’ला खरी’दते स’मय उ’से न दुका’नदार को खो’लने दें औ’र न आ’प खु’द खो’लें। ता’ला स’ही है या न’हीं य’ह जां’चने के लि’ए भी न खो’लें। ब’स बं’द ता’ले को खरीद’कर ले आ’एं।