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दिवा’ली की रा’त घ’र की इ’स जग’ह प’र भी र’खें दीप’क, मां ल’क्ष्मी आ’एंगी आ’पके घ’र….

धार्मिक खबर

दिवा’ली का दि’न ऐ’सा दि’न हो’ता है ज’ब स’भी मां ल’क्ष्मी के घ’र में आ’गमन की काम’ना क’रते हैं। इ’स दि’न घ’र में स’भी ज’गह लो’ग दीप’क ज’लाते हैं। मां ल’क्ष्मी का शु’भ मु’हर्त में पू’जन क’रने के बा’द दी’पक ज’लाए जा’ते हैं। आ’पको ब’ता दें कि दी’पक ते’ल औ’र घी दो’नों के जला’एं जा’ते हैं। दीप’क ख’रीदने से प’हले इ’स बा’त का ध्या’न र’खें कि घ’र में दीप’कों की सं’ख्या शु’भ सं’ख्या में हो’नी चा’हिए। जै’से -51, 101, 151 आ’दि।सब’से पह’ला दीप’क मा’ता ल’क्ष्मी के सा’मने ज’लाया जा’ता है। य’ह शु’द्ध घी का दी’पक हो’ना चा’हिए। इ’सके बा’द ते’ल का दीप’क भी जला’या जा’ता है। ल’क्ष्मी पू’जा के स’मय सा’त मु’ख वा’ला घी का दी’पक ज’लाने से आ’र्थ‌िक मा’मले में वृ्’द्धि हो’ती है।  आप’को ब’ता दें कि इ’न 5 ज’गहों प’र भी दी’पक ज’लाने चा’हिए। ऐ’सा क’हा जा’ता है कि ये भी आ’पकी सं’पत्ति हैं इस’लिए इ’न ज’गहों प’र दी’पक ज’लाने से आ’पकी इ’स सं’पत्ति में वृ’द्धि हो’ती है।

घ’र के मु’ख्य दरवा’जे प’र जला’एं दी’पक 

दि’वाली की रा’त लो’गों को दे’सी घी का दीप’क घ’र के मु’ख्य द्वा’र प’र जला’ना चाहि’ए।य’ही व’ह स्था’न है ज’हां से म’हा ल’क्ष्मी का आग्म’न हो’गा। 

आ’पको ध’न के स्थ’ल या’नी आ’पकी दुका’न या घ’र की ति’जौरी के पा’स भी इ’स दि’न दी’पक जला’ना चा’हिए। ति’जौरी के पा’स दिवा’ली के दि’न जरू’र दी’पक रखें’य़

वा’हन भी ह’मारी सं’पत्ति हैं इ’सलिए इ’स दि’न का’र, बाइ’क के थो’ड़ी दू’र भी दीप’क जला’ना चा’हिए,

आ’पके घ’र ज’हां पा’नी आ’ता है उ’स ज’गह भी दीप’क ज’लाया जा’ता है। य’ह भी आ’पके लि’ए ल’क्ष्मी का ही रू’प है।

इ’सके सा’थ ही र’सोई घ’र जो आप’की अन्नपू’र्णा है, दी’पक ज’लाना चाहि’ए।