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यहॉ महिलायें नही पहनती ब्लाउज, अगर किसी महिला ने धोकें से भी पहन लिया तो उसकों……👇

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महि’ला’एं साड़ी के साथ ब्ला’उ’ज़ पहनती है, क्योंकि वह उन्हें एक आ’कर्षक लुक देता है। साथी शरीर के उपरी भाग को भी क’वर करता है। लेकिन आज भी भारत में एक जगह ऐसी मौ’जूद है जहां महिलाएं साड़ी के साथ ब्लाउ’ज़ नहीं पहनती हैं। जिसके पीछे एक अगल ही वजह छुपी है। चलिए जानते है…छत्तीसगढ़ की आदिवासी महिलाएं अक्सर बिना ब्लाउज़ के साड़ी पहनती हैं। उन्हें यहां की एक परंपरा के अनुसार ब्लाउज पहनने की अ’नुम’ति नहीं है। इस परं’प’रा के अंतर्गत म’हिलाएं ना तो खुद ब्लाउज पहनती है और ना ही गांव की किसी और महिलाओं को इसे पहनने देती हैं।

यहां रहने वाले सभी लोग शुरू से अपनी परंपरा को निभाते चले आ रहे हैं। लेकिन हाल ही में ऐसी खबरें आई थी कि यहां रहने वाली कुछ महिलाओं ने ब्लाउज पहनना शुरू कर दिया है। जिस वजह से गांव वालों ने उन पर प’रंप’रा की अ’वहेल’ना का आ’रोप भी लगाया।

यहां इस परंपरा को बचाने में पुराने लोग लगे हुए है। बिना ब्लाउज साड़ी पहनने को गातीमा’र स्टाइल कहा जाता है। यह परंपरा एक हजार साल से लोग निभाते चले आ रहे हैं। आदिवासी महिलाओं का कहना है कि बिना ब्लाउज़ के साड़ी पहनने पर काम करने में सुविधा होती है। ऐसे खेत में काम करना और बोझ उठाना काफी आसान हो जाता है। जबकि जंगली इलाकों में महिलाएं गर्मी की वजह से ब्लाउज पहनना पसंद नहीं करती। वहीं दूसरी तरफ शहरों में अब बिना ब्लाउज साड़ी पहनने का फैशन भी चलता दिखाई दे रहा है।