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सप’नों की रा’जकुमारी चाहिए तो अवि’वाहित जा’तक करें, इन च’मत्कारी मं’त्रो का जाप.. और रखे इन बातों का ख्या’ल….

धार्मिक खबर

यदि किसी अवि’वाहि’त जात’क को विवा’ह होने में बार-बार बा’धा’ओं का साम’ना करना पड़ रहा हो तो नि’त्य प्रा’तः स्ना’न कर सात अंजु’ली जलं ”वि’श्वा’वसु” गंध’र्व को अ’र्पित करें और नि’म्न मंत्र का 108 बार मन ही मन जप करें। ध्यान रहे कि इसे गु’प्त रखें। अपने परि’जनों के अ’तिरि’क्त किसी को भी इस बात का आ’भास न होने पाए कि विवा’ह के उ’द्देश्य से जपा’नुष्ठान किया जा रहा है। सा’यंका’ल में भी एक माला जप मान’सिक रू’प में किया जाए। ऐसा करने से एक माह में सुं’दर, सुशी’ल और सु’योग्य क’न्या से विवा’ह नि’श्चित हो सकता है।

मं’त्र :


वि’श्वावसु’र्नामगं ध’र्वो क’न्याना’मधि’पतिः।

स्वरू’पां सा’लंकृतां क’न्या दे’हि मे न’मस्तस्मै॥

वि’श्वाव’स्वे स्वा’हा॥”

इस प्रकार से विश्वा’वसु नाम’क गंध’र्व को सात अंजु’ली जल अ’र्पित करके उप’रोक्त मंत्र/विद्या का जप करने से एक माह के अं’दर अलं’कारों से सुस’ज्जित श्रे’ष्ठ प’त्नी की प्रा’प्ति होती है। शा’स्त्रों के अनु’सार :

पानी’यस्यान्जली’न स’प्त द’त्वा, वि’द्यामिमां ज’पेत्।

सा’लंकारां व’रां क’न्यां, ल’भते मास मा’त्रतः॥

ॐ वि’श्वावसु गं’धर्व क’न्यानाम’धिपति।

सुव’र्णा सा’लंकारा क’न्यां दे’हि मे दे’व॥