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इन ची’जों में छोड़ दे सं’कोच, होंगे मा’लामाल, मिलेगी स’फलता जानिए….

धार्मिक खबर

म’नुष्य के जीव’न को सुग’म बनाने के लिए आचा’र्य चा’णक्य ने अपने नी’तिग्रंथ में सैकड़ों नी’तियों का व’र्णन किया है. ‘चा’णक्य नी’ति’ में आ’चार्य ने चार ऐसी ची’जों के बारे में व’र्णन किया है जिसमें सं’कोच करने से म’नुष्य विफ’ल हो जाता है. वो कहते हैं कि व्य’क्ति को जी’व’न के हर क्षे’त्र में संको’च नहीं करना चाहिए.

धन’धान्यप्र’योगेषु वि’द्यासङ्ग्रह’णेषु च।
आ’हारे व्यव’हारे च त्यक्त’लज्जः सुखी भ’वेत।।

चाण’क्य इस श्लो’क के मा’ध्यम से बताते हैं कि व्य’क्ति को पैसे से जुड़े मा’मले में कभी भी सं’कोच नहीं करना चाहिए. अगर आपका पैसा किसी के पास है तो उससे बेझि’झक मां’गना चाहिए. सं’कोच करने पर आपको हा’नि हो सकती है.

चा’णक्य के मुता’बिक ज्ञा’न के मा’मले में भी व्य’क्ति को श’र्म नहीं करना चाहिए. आ’चार्य के मुता’बिक अगर व्य’क्ति को कोई बात सम’झ में न आए तो उसे तु’रंत पू’छ लेना चाहिए, नहीं तो भ्र’म की स्थि’ति बनती है और आगे का रा’स्ता कठि’न हो जाता है. साथ ही परी’क्षा में सफ’ल होने के लिए भी श’र्म को कि’नारे कर दे’ना चाहिए.

भोजन से जु’ड़े माम’लों में भी व्य’क्ति को श’र्म करने से बचना चाहिए. भू’खा रहने से व्य’क्ति की सेह’त ख’राब हो सकती है. इसलिए जब भू’ख लगे तो श’र्माना छोड़’कर खाना मां’ग लेना चाहिए. क’ई लोग जा’न-पह’चान की जगह पर श’र्म से भू’खे रह जाते हैं.

काम और का’रोबार के मा’मले में भी संको’च नहीं करना चाहिए. श’र्म के का’रण ची’जें रह जाती हैं और व्य’क्ति आगे नहीं ब’ढ़ पाता है. अगर आप किसी भी काम में 100 फीस’दी सफ’ल होना चाहते हैं तो श’र्म को त्यागक’र भ्र’म को दूर कर’ना चाहिए.