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चा’णक्य नी’ति: अगर आपको पाना है का’मयाबी तो रखें इन बातों का ध्यान !! नही तो..

जी’वन में काम’याबी हासिल करने के लिए आ’चार्य चा’णक्य ने अपनी किताब चा’णक्य नीति में कई कार’गर उ’पाय ब’ताएं हैं. सफ’लता के मा’र्ग को अप’नाने के लिए आइए जानते हैं चा’णक्य की ये तीन अहम नी’तियां…

चाण’क्य कहते हैं कि इं’सान को को’शिश नहीं छो’ड़नी चा’हिए, क्योंकि जब तक इं’सान सा’हस नहीं दि’खाता तब तक जी’वन के रे’स में जीत हा’सिल करना उसके लिए मु’श्किल होता है. चा’णक्य की नी’तियों पर चल’कर स’म्राट बनने वाले चं’द्रगुप्त मौ’र्य ने एक बार आ’चार्य चा’णक्य से पूछा कि कि’स्मत तो पहले ही लि’खी जा चुकी है तो फिर कु’छ भी क्यों किया जाए, जो होना होगा हो जाएगा. इसके जवा’ब में आ’चार्य चा’णक्य ने कहा कि क्या पता कि’स्मत में लिखा हो कि को’शिश करने से काम’याबी मिलेगी, इंसान को को’शिश करते रह’ना चा’हिए.

आ’चार्य चाण’क्य कहते हैं कि इंसा’न को रा’शि और भा’ग्य के ब’जाय अपने क’र्मों पर भ’रोसा र’खना चा’हिए. चा’णक्य आगे क’हते हैं कि राम और रा’वण दोनों एक ही राशि के थे लेकिन उन्हें परिणाम उनके क’र्मों के हि’साब से मिला. आ’चार्य चाण’क्य के मुता’बिक, किसी भी इं’सान के खरा’ब समय में उ’सका मजाक नहीं बनाना चाहिए, क्यों’कि समय बद’लते देर नहीं लगती. वो बताते हैं कि समय के साथ कोय’ला भी धी’रे-धी’रे हीरे में ब’दल जाता है.

वहीं, चाण’क्य ये भी कहते हैं कि का’म’याब जीवन व्यतीत करने की चाहत रखने वाले व्य’क्ति को बहरा हो जाना चाहिए. उसे सं’सार की किसी भी ऐसी बात पर ध्यान नहीं देना चा’हिए जिससे उसका मनो’बल नीचे हो जाए. कुछ न करने वाले व्यक्ति हमेशा मनो’बल गिराने का काम करते हैं. चा’णक्य कहते हैं कि इंसान को किसी और से खुद की तुल’ना कभी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि सभी का स’मय-स’मय अलग होता है. ठीक वैसे ही जैसे सू’र्य और चं’द्रमा भी अ’लग-अ’लग समय पर च’मकते हैं.