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पुरुषों को बैठकर पे’शाब करना चाहियें या खड़े होकर, जानें कौन सा है सही तरीका..?👇

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आमतौर पर पुरुषों और महिलाओं का पे’शाब करने का त’री’का अलग-अलग होता है। म’हिलाएं बैठकर यू’रिन करती हैं तो वहीं पुरुष खड़े होकर मू’त्र वि’सर्जि’त करते हैं। समय-समय पर इस धा’र’णा को लेकर दुनिया भर के वै’ज्ञा’नि’क इस पर च’र्चा करते रहते हैं। कुछ लोग पु’रु’षों के बै’ठक’र पे’शा’ब करने को सही ठहराते हैं तो वहीं कुछ खड़े होकर पे’शा’ब करना सही मानते हैं। जब कि कुछ का न’जरि’या साफ-सफाई और स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ा हुआ है, जिनकी अपनी अलग ही थ्‍योरी है। 

हालांकि, कुछ पुरुष बै’ठकर इसलिए पे’शा’ब करते हैं ताकि पैरों पर छीं’टे न पड़े और गं’दगी न फैले। लेकिन कई लोग ज’ल्‍दबा’जी में ऐसा न कर के खड़े होकर ही पेशा’ब करते हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि पुरुषों को पे’शा’ब कै’से करना चाहिए? इस सवाल के जवाब को जा’नने और स’मझ’ने के लिए ह’मने कुछ शो’धों पर न’जर डा’लने के सा’थ ही ए’क्‍स’पर्ट से भी बात की है। जि’स पर हमें कुछ बे’हतरी’न जा’नका’री मिली है।

ज्‍या’दा’तर लोग पु’रुषों के लिए ख’ड़े होकर पे’शा’ब करना ज्‍यादा व्‍य’व’हारि’क मानते हैं। इससे उन्‍हें ज्‍यादा स’मय नहीं लगता है। शायद यही वजह है कि पु’रु’ष मू’त्रा’लय के बाहर ज्‍या’दा लं’बी ला’इन देखने को नहीं मिलती है। हा’लांकि, कई वि’शेष’ज्ञ मानते हैं कि पेशाब करते समय आपकी पो’जिश’न कैसी है इसका असर बाहर निकल रहे मू’त्र की मा’त्रा पर पड़ता है।

बीबीसी की तरफ से हुए एक अध्‍ययन के अनुसार, जिन पु’रुषों को प्रो’स्‍टेट की स’मस्‍या हो और सू’जन हो तो उनके लिए बैठकर पे’शाब करना ज्‍यादा फायदेमंद होता है। इस शो’ध में, स्‍वस्‍थ पुरुषों और लोअर यू’रीन’री ट्रै’क्‍ट सि’मट’म्‍स वाले पुरुषों के बीच तु’ल’ना की गई है। अध्‍ययन में पाया गया है कि, इस समस्‍या से जू’झ रहे लो’गों में पाया गया है कि यदि वह बै’ठक’र पे’शा’ब करते हैं तो उनके मू’त्र’मार्ग पर द’बा’व कम हो जाता है। इससे उनके पे’शाब करने की क्रिया आ’सा’न हो जाती है। लेकिन, स्‍’वस्‍थ पु’रु’षों में खड़े हो’कर या बै’ठ’कर पे’शा’ब करने में कोई अं’त’र नहीं देखा गया है।

पु’रुषों के बै’ठक’र या ख’ड़े होकर पे’शा’ब करने में और क्‍या फा’यदे और नु’कसा’न हैं, इस पर और अध्‍ययन किया जाना बाकी है। वि’शेष’ज्ञ मानते हैं कि खड़े होकर पे’शाब करने से मूत्र फै’ल सकता है, जो गं’द’गी का कारण बनता है। ऐसे में हमेशा खुले में पे’शाब करने के ब’जा’ए किसी सुलभ शौ’चाल’य में करें।