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चौ’का’नें वाली खबर: र’क्षा’मंत्री राजनाथ सिंह का क’बूल’नामा, भारत की ह’जारों वर्ग किलोमीटर जमीन ची’न ने की ज’ब्त…

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र’क्षा मंत्री रा’जना’थ सिं’ह ने आज लो’कस’भा में एक चौं’का’ने वाला ब’या’न दिया कि ल’द्दा’ख में 38000 वर्ग किलोमीटर भा’रती’य भू’मि को ची’न ने ज’ब्त कर लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि पा’किस्ता’न ने पा’किस्ता’न के क’ब्जे वाले क’श्मी”र में चीन को 5180 वर्ग कि’लोमी’टर भूमि अ’वै’ध रूप से दी थी। इस बी’च, ल’द्दा’ख में स्थिति चु’नौती’पू’र्ण है।

ल’द्दा’ख सी’मा पर चीन की ओर से ल’गा’तार घु’स’पैठ हो’ती र’ही है। सै’न्य और रा’ज’नी’ति’क स्त’रों पर कई दौ’र की बा’तची’त के बा’व’जूद, ची’न की बु’राइ’याँ जा’री हैं। सी’मा पर क्या स्थिति है? देश को यह जानने का अ’धिका’र है।

इस मु’द्दे पर कां’ग्रेस ने लो’क’सभा में स्थगन प्र’स्ता’व पेश किया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अ’व’सर पर एक बयान दिया। हालाँकि अ’ध्यक्ष ने वि’प’क्ष के स’द’स्यों को प्र’श्न पूछने की अनुमति नहीं दी। इसलिए र’क्षा मंत्री के ब’यान के बाद कां’ग्रेस स’दस्यों ने इ’स्ती’फा दे दिया।

अप्रैल से ची’न की बु’रा’ई

पूर्वी ल’द्दा’ख की गा’ल्वन घा’टी में 15 जून को हिं’स’क झड़पें हुईं। इसमें 20 हिं’दुस्ता’नी सै’निक श’हीद हो गए। हालांकि र’क्षा मं’त्री रा’ज’ना’थ सिंह ने स्वीकार किया कि अ’प्रै’ल के बाद से गा’लवन घा’टी में ची’नी अ’त्याचा’र चल रहे थे।
अप्रैल में पूर्वी ल’द्दाख सी’मा पर ची’नी सै’नि’कों और विज्ञान में वृद्धि देखी गई। मई में चीनी सै’नि’कों ने गा’ल्वन घाटी में भा’रतीय सै’नि’कों को रोका। दोनों सै’नि’क आ’मने-सामने आ गए।
इस त’ना’व की पृ’ष्ठ’भूमि के खि’ला’फ कमां’डर स्त’र पर 6 जून को चर्चा हुई।
15 जून को ची’न की ओर से हिं’स’क सं’घ’र्ष हुआ था। भारत के ब’हा’दुर सै’नि’कों ने ब’लि’दा’न दिया। चीन ने इसका जो’र’दार ज’वा’ब दिया। यह ची’न के लिए एक बड़ी क्ष’ति थी।
जहां सं’यम की ज’रूरत है वहीं सं’यम है। जहां ब’हा’दुरी की जरूरत है, वहां हमारे सै’नि’कों ने ब’हा’दुरी दि’खाई है। पूरे देश को सै’नि’कों के कौश’ल पर भ’रो’सा है।
र”क्षा मंत्री ने क्या कहा

दोनों देशों ने औ’प’चारि’क रूप से स्वी’कार किया है कि सीमा मु’द्दा एक ज’टि’ल है।
इस समस्या को हल करने के लिए धैर्य की आवश्यकता है। संतोष शां’ति’पूर्ण चर्चा के मा’ध्य’म से आ सकता है।
1993 और 1996 के सम’झौ’तों के अनु’सार नि’यंत्रण रेखा का सम्मा’न किया जाना चाहिए और इसका उ’ल्लं’घन नहीं किया जाना चाहिए। यह उल्लेख किया गया है कि दोनों देश यहां सै’नि’कों की तै’ना’ती को क’म करेंगे।
ची’न ने लद्दा’ख में 38000 वर्ग किलोमीटर भा’रती’य जमीन ज’ब्त की है।
पा’किस्ता’न ने अ’वै’ध रूप से 5180 वर्ग कि’लो’मीटर पी’ओ’के चीन को अ’वै’ध रूप से सौंप दिया है।
अरुणाचल सीमा के पास ची’नी सै’नि’कों की सभा!

लद्दा’ख सीमा पर क’ह’र ब’र’पा रहा चीन अब अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर भी से’ना जु’टा’ने में लग गया है। एल’एसी से 20 किमी की दूरी पर ची’नी सै’निक हैं। इस बीच, भा’र’तीय से’ना ने हाई अ’ल’र्ट जा’री कर दिया है और ज’वान हाई अ’ल’र्ट पर हैं।

एएन’आई के मु’ताबि’क चीनी सै’नि’क टूलिंग, चांगज और फिशटेल 2 में पहुंचे हैं। यह ए’ल’एसी से 20 किलोमीटर की दूरी पर है। यह घु’सपै’ठ करने के लिए ची’न की प्र’वृत्ति हो सकती है। हिंदुस्तानी से’ना अ’लर्ट पर है। जवा’नों की संख्या बढ़ा दी गई है।