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आश्चर्य : बिकरू गॉव में दिखा वि’कास दुवे का भू’त, द’हश’त में गॉव वालें!! 👇

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कान’पुर के गांव बि’क’रू में कु’ख्‍या’त अ’परा’धी वि’का’स दुबे की मौ’त के बाद भी उसका आ’तं’क कायम है। अब आ’तं’क है उसके भूत का, शा’म ढ’ल’ते ही इस गांव में स’न्‍ना’टा पस’र जाता है, लोग अपने घरों से बाहर निक’लने में कत’राते हैं। इस बीच कुछ लोगों ने दा’वा किया है कि उन्‍होंने वि’का’स दुबे के भू’त को वहां मंड’राते
देखा है। ढाई महीने पहले इसी जगह एन’काउं’ट’र में 8 पु’लि’स’वा’ले मा’रे गए थे, बाद में वि’का’स दुबे की भी एन’काउं’ट’र में मौत हुई थी।

बि’क’रू के रहने वालों का कहना है कि अब भी उन्‍हें रात में गो’लि’यों की आवाजें सुनाई देती हैं। एक ग्रामीण ने अपना नाम तो नहीं बताया लेकिन कहा, ‘आज भी गो’लि’यों की आ’वा’ज सुनाई देती है। सब जानते हैं पर बोलता कोई नहीं। कुछ लोगों ने वि’का’स भइया के भू’त को देखा भी है।’ द’बी जु’बान में गांव वाले कहते हें कि उन्‍हें अकसर वि’कास दुबे अपने घर के खं’ड’हर पर बैठा दिखाई देता है। 2 और 3 जुलाई की रात को यहां हुए नर’संहा’र के बाद शासन ने उसका मकान बुल’डोज’र से ढहा दिया था।

खं’ड’ह’र में बैठा मुस्‍क’रा रहा था वि’का’स’
एक बुजुर्ग ने बताया कि कुछ दिनों पहले जब वह रात में ल’घुशं’का के लिए उठे तो उन्‍होंने देखा कि वि’कास दुबे वहां बैठा मु’स्‍कुरा रहा है। बुजुर्ग ने बताया, ‘ऐसा लग रहा था कि जैसे वह हम लोगों को कुछ बताना चाह रहा था। वह अपनी मौ’त का बदला लेगा जरूर।’

इसी तरह वि’कास दुबे के खं’ड’हर हो चुके मक

पास रहने वाले एक परिवार का दावा है कि उन्‍हें भी कई आवाजें सुनाई दी हैं। एक महिला ने कहा, ‘कई बार हमें सुनाई देता है जैसे कुछ लोग आपस में बात कर रहे हैं, लेकिन वह बातचीत साफ नहीं सुनाई देती। बीच-बीच में हंसने की आवाजें भी सुनाई देती हैं, ठीक वेसी ही हंसी जैसी जब वि’कास जिं’दा था तो यहां सुनाई देती थी।’


ड्यूटी पर मौ’जूद पु’लि’स’वालों को नहीं दिखा भूत


हालांकि, वि’कास के टू’टे मकान पर चार पु’लि”सवा’लों- दो पु’रुष, दो महिलाओ की ड्यू’टी लगी है। लेकिन ऑन रिकॉर्ड इनमें से किसी ने नहीं कहा कि उन्‍हें गो’लि’यों की आवा’जें सु’ना’ई दीं या विकास के भू’त को ‘देखा’ है। उनमें से एक कहता है, ‘हमें यहां अपनी ड्यूटी करने में कोई स’म’स्‍या नहीं है।’ इससे ज्‍यादा वह कुछ भी कहने से मना कर देता है।

गांव में ही रहने वा’ले एक पु’जा’री का कहना है कि इन बातों को झू’ठा नहीं कहा जा सकता। वह समझाते हैं, ‘अगर किसी की अप्रा’कृति’क मौ’त होती है तो ऐसी बातें होती हैं। वि’का’स दुबे के मा’म’ले में न तो उ’सका अं’ति’म सं’स्‍का’र ठीक से हुआ और न ही उसके बाद के क्रिया’क’र्म। एन’काउं’ट’र में मा’रे गए उ’स’के सा’थि’यों के साथ भी ऐसा ही हुआ।’