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मोदी बनना चाहते थें सन्यासी, लेकिन इस गुरू की डांट ने बदल दी सारी जिन्दगी….👇

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देश भर में 05 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इसका अपना महत्व होता है। ये एक ऐसा दिन होता है जब हम अपने गुरुओं (शिक्षकों) के द्वारा किए गए मार्गदर्शन और ज्ञान के बदले हम उन्हें श्रद्धा से याद करते हैं। इस दिवस पर हम आपको नरेंद्र मोदी के गुरू के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी वजह से वह देश के पीएम बने। दरअसल पीएम मोदी समान्य जीवन त्याग कर संन्यासी बनना चाहते थे, लेकिन उनकी जिंदगी में एक गुरु का आगमन हुआ और फिर रास्ता बदल गया। इस गुरू का नाम था स्वामी आत्मास्थानंद।

यह सब कुछ 1996 में तब शुरू हुआ जब स्वामी आत्मस्थानंद शहर के आर.के.एम. आश्रम को सम्भालने के लिए गुजरात के राजकोट आए थे। स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से प्रेरित युवा नरेन्द्र राजकोट में स्वामी जी की यात्रा के दौरान उनके द्वार पर पहुंचे और आश्रम में शरण ली। स्वामी आत्मस्थानंद आश्रम में कुछ समय व्यतीत करने के बाद मोदी ने उनको बताया कि वे एक भिक्षु बनना चाहते हैं तो प्रमुख भिक्षु का जवाब था कि संन्यास उनके लिए नहीं है। राजकोट का आश्रम किसी भी तरह से उसको भिक्षु नहीं बना सकता।

मोदी को अपनी इच्छा पूरी करने के लिए बेलुर में आर.के.एम. मुख्यालय में जाना होगा। स्वामी आत्मस्थानंद ने आर.के.एम. के तत्कालीन प्रधान स्वामी माधव नंद को एक पत्र लिखा और मोदी को पत्र के साथ बेलुर भेज दिया। माधव नंद ने भी मोदी के अनुरोध को खारिज कर दिया। उन्होंने युवा नरेन्द्र को बताया कि उनका काम लोगों के बीच है। संन्यास में नहीं। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी उनसे मिलते रहे।

बहुत से लोगों को मालूम नहीं कि मोदी ने जब प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी तो उनकी जैकेट की जेब में च्प्रसादी फूलज् था। यह फूल स्वामी की तरफ से नरेन्द्र भाई को लिखे एक पत्र के साथ भेजा गया था। माना जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राजनीति में जाने के लिए उन्होंने ही प्रोत्साहित किया था।पीएम मोदी के गुरु आत्मास्थानंद महाराज का 18 जून 2017 को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।