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राम मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल होगी फल्गु नदी की रेत, जानिये इसके पीछे का बड़ा कारण

राम मंदिर निर्माण को लेकर रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शनिवार को बैठक हुई. इस बैठक में इस पर चर्चा की गई कि भूमिपूजन की तारीख क्या हो. खबर ये भी है कि प्रधानमंत्री कार्यालय को रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से 3 अगस्त और 5 अगस्त की तारीख भेजी गई है. राम मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल होगी फल्गु नदी की रेत, जानिये इसके पीछे का बड़ा कारण.

राम मंदिर भूमि-पूजन के दौरान गर्भगृह के अंदर चांदी की पांच ईंट का इस्तेमाल किया जाएगा. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, ये पांच ईंट पांच नक्षत्रों का प्रतीक होंगी. माना जाता है कि अभिजीत मुहूर्त में भगवान राम का जन्म हुआ था, उसी हिसाब से भूमि-पूजन का वक्त भी निर्धारित किया गया है. विश्व प्रसिद्ध मोक्ष भूमि गया से भी भगवान राम का कनेक्शन है, लिहाजा वहां की पवित्र फल्गु नदी की रेत का इस्तेमाल भी मंदिर में किया जा रहा है. बताया जाता है कि फल्गु के तट पर भगवान राम ने अपने भाई लक्ष्मण और सीता के साथ पिता राजा दशरथ की आत्मा की मुक्ति के लिए पिंड दान किया था. यही वजह है कि फल्गु नदी की रेत का उपयोग अयोध्या में बनने जा रहे भगवान राम के मंदिर में किया जा रहा है.

गया में विश्व हिंदू परिषद के विभाग अर्चक पुरोहित प्रमुख प्रेमनाथ टइया ने बताया है उन्हें यह जानकारी मिली कि अयोध्या में मंदिर निर्माण में सात समुद्रों का पानी, देश की सभी धार्मिक नदियों का पानी, प्रमुख धामों की मिट्टी और फल्गु नदी के बालू का उपयोग किया जाना है. प्रेमनाथ टइया ने ये भी बताया कि गया से फल्गु नदी का बालू करीब एक महीने पहले ही अयोध्या मंगवा लिया गया था. उन्होंने ये भी बताया कि गया धाम से सवा किलो चांदी की ईंट भी अयोध्या भेजी जा रही हैं.