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इस राज्य सरकार द्वारा पतंजलि को मिला फिर से झटका, लगाया ये बड़ा आरोप

कोरोना वायरस वक्त के साथ-साथ तेजी से फैलता जा रहा है. दुनिया में कोरोना मामलों की कुल संख्या 14 मिलियन पार कर गई है. कोरोना संक्रमितों की संख्या 13 मिलियन से 14 मिलियन पहुंचने में महज चार दिन लगे. यानी कि दुनियाभर में 1 मिलियन (10 लाख) कोरोना मामले 100 घंटे से भी कम समय में बढ़ गए. ऐसा पहली बार हुआ है जब कोरोना के 10 लाख मामले इतने कम समय में सामने आए हैं. कोरोना को ख़त्म करने के लिए सारे देश वैक्सीन बनाने में जुटे हैं. इसी क्रम में पतंजलि ने भी एक दवा बनाकर दावा किया था. आइये आपको बताते हैं इससे जुड़ी पूरी बात.

मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस सी वी कार्तिकेयन ने चेन्नई की कंपनी अरुद्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड की अर्जी पर 30 जुलाई तक के लिए यह अंतरिम आदेश जारी किया. अरुद्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड का कहना है कि ‘कोरोनिल’ 1993 से उसका ट्रेडमार्क है. लिहाजा इसका नाम कोई और कंपनी नहीं रख सकती. अरुद्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड केमिकल्स और सैनिटाइजर्स बनाती है, जिसका इस्तेमाल हेवी मशीनरी और कंटेनमेंट यूनिट्स में किया जाता है. कंपनी के मुताबिक उसने 1993 में कोरोनिल-213 एसपीएल और कोरोनिल-92बी का रजिस्ट्रेशन कराया था. कंपनी का दावा है कि वह लगातार इस ट्रेडमार्क को रिन्यू कराती रही है.

कंपनी ने एक बयान में कहा है, ‘फिलहाल इस ट्रेडमार्क पर 2027 तक हमारा अधिकार वैध है.’ कंपनी ने इस ट्रेडमार्क को वैश्विक स्तर का बताया है. इस कंपनी ने यह भी कहा है कि उसकी क्लाइंट भेल और इंडियल ऑयल जैसी कंपनिया हैं. अपने दावे को सिद्ध करने के लिए याचिकाकर्ता ने कोर्ट में पांच साल का बिल भी पेश किया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, कंपनी ने कोर्ट में कहा कि पतंजलि की ओर से बेची जाने वाली दवा का मार्क ठीक उसकी कंपनी की तरह है. बेचे जाने वाले प्रोडक्ट भले ही अलग हों लेकिन ट्रेडमार्क एक जैसा है.