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मिल्खा सिंह जी की आ’खिरी इच्छा सुनकर रो पड़ेगे आप, जानिए…..

हिंदी खबर

पाकिस्तानी औ’रतों का दिल जीत लिया था सरदार मिल्खा ने
दोस्तों मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि मेरी आ’खिरी ख्वाहिश यह है कि हिंदुस्तान से कोई न कोई लड़का या लड़कीं ऐसा निकले जो भारत का तिरंगा ऑ’लम्पिक खेलों

फ्लाइंग सिख (Flying Sikh) के नाम से मश’हूर मिल्खा सिंह अब हमारे बीच नहीं हैं. आज हम आपको सि’र्फ इतना बताना चाहते हैं कि आप कैसे मिल्खा सिंह से काफी कुछ सीख सकते हैं. मिल्खा सिंह भारत के इक’लौते ऐसे एथलीट थे, जिन्होंने 400 मीटर की दौड़ में एशियाई खेलों के साथ साथ कॉम’नवेल्थ खेलों में भी देश के लिए गोल्ड मेडल जीता था. अपने करियर में उन्होंने 80 में से 77 रेस जीती, लेकिन रोम ओलम्पिक्स में वो अपनी हा’र को कभी नहीं भूले.

द’र्द को रास्ते में रुका”वट नहीं बनने दिया

इस रेस में वो 0.1 Second के अं’तर से चौथे स्थान पर रहे थे और ओ’लम्पिक्स में देश के लिए पदक जीतने से चू’क गए थे. ये क्षण उनके लिए काफी मुश्कि’ल भरा था. हालांकि इस द’र्द को उन्होंने कभी भी अपने रास्ते में रुका’वट नहीं बनने दिया और यही बात वो दूसरे खिलाड़ियों को सिखाते रहे.

वर्ष 1984 में जब समर ओलम्पिक्स का आयोजन अमेरिका के लॉस एं’जिल्स में हुआ, तब पीटी उषा 400 मीटर दौड़ के फाइनल मुकाबले में पहुंच गई थीं, लेकिन मिल्खा सिंह की तरह वो भी पदक जीतने से सेकंड्स के 100वें हिस्से से चू’क गईं. इस असफलता ने उनके मनोबल को तो’ड़ा और उन्हें निरा’शा ने घेरना शुरू कर दिया.

उस समय पीटी उषा ने मिल्खा सिंह से इस पर बात की थी और मिल्खा सिंह के शब्द थे कि पीटी उषा उनकी तरह ही काफी मेहन’ती हैं, लेकिन वो सिर्फ इसलिए उनसे ज्यादा मेडल जीत पाए क्योंकि, उन्होंने ज्यादा देशों की यात्रा की और एक के बाद एक प्रतियोगिताओं में हि’स्सा लिया. इस सलाह ने तब पीटी उषा का मनोबल बढ़ाया और आने वाले वर्षों में उन्होंने देश के लिए कई मेड’ल जीते.