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जब रातों रात सारी लड़कियां प्रेग्नें’ट हो गई, आखिर क्या था पूरा माम’ला, जानिए…

हिंदी खबर

रा’तों रात गर्भव’ती महिलाओं में प्रेग्नें’सी और डिलीवरी को लेकर चिं’ता होना स्वाभावि’क है. लेकिन इस महा’मारी ने प्रेग्नेंट महिलाओं में इस चिं’ता और स्ट्रेस को और ज्यादा बढ़ा दिया है. एक तरफ जहां को’विड पॉजि’टिव होने पर गर्भव’ती मां और होने वाले बच्चे दोनों को जान का ख’तरा हो सकता है. वहीं, दूसरी तरफ स्ट्रेस और डिप्रेश’न का असर भी मां और बच्चे को प्रभा’वित कर सकता है.

क्या हैं तनाव के का’रण ?
किसी भी महिला के लिए बच्चे को जन्म देना बेहद खास एहसा’स होता है. किसी बच्चे को जन्म देना चैलेंजिग होता है. इन 9 महीनों में प्रेग्नें’ट महिलाओं को स्ट्रेस से दूर रहने की ज’रूरत है. तनाव के कार’ण मां और आने वाले बच्चे दोनों के हेल्थ पर बुरा अ’सर पड़ सकता है. प्रेग्नेंसी के दौरा’न महिलाओं के अंदर कई तरह के चेंज आ जाते हैं, जिसका असर उनके व्यवहार और मू’ड पर पड़ता है.

प्रेग्नें’सी की वज’ह से शारीरिक और मानसिक परिव’र्तन होते हैं. इसके अ’लावा हॉर्मोनल बद’लाव होना भी आम बात है. कई बार महिलाएं पर्सन’ल लाइफ या प्रोफेशनल लाइफ में काम और जिम्मेदा’रियों को लेकर भी स्ट्रे’स लेने लगती हैं. इन परिस्थितियों में अक्स’र पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को ज्यादा स्ट्रे’स हो जाता है.