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भगवान के सामने रोने से क्या होता है ,क्या भगवान असल में करते हैं..

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भगवान के सामने रोने वाला संसार के सामने नहीं रोता

भगवान के सामने रोते हैं, उसे संसार के सामने नहीं रोना पड़ता है। भगवान अपने भक्तों के लिए दौड़े चले आते हैं और अपने पास रख लेते हैं। उक्त बातें धनसार गोविंद भवन मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को कथा का व्याख्यान कर रहे अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कहीं। उन्होंने कहा कि भगवान ने अपने विराट स्वरूप का दर्शन केवल एक बार और एक ही को दिखाया है। वह भी महाभारत के युद्ध में अर्जुन को। इसके बाद उन्होंने कभी किसी को विराट स्वरूप के दर्शन नहीं दिए।

जीवन का व्यहार सत्य पर चलता है

जीवन का व्यवहार भी सत्य पर ही चलता है। लोगों ने धर्म की परिभाषा बदल दी है। धर्म के चार स्तंभ तप, सत्य, दया व पवित्रता हैं। कलयुग में मनुष्य से न तो तप हो सता है और न ही भगवा की तरह दयालु हो सकते हैं। केवल सत्य ही है, जो पहले भी स्थापित था और आज भी स्थापित है।

आधुनिकता से बचे

आज के दौर में देश की संस्कृति बिगड़ती जा रही है। कारण है आधुनिक युग के उपकरण। दृष्टि, मन, मोबाइल, टीवी, फिल्म जैसे अनेक साधन सहज उपलब्ध हैं। आने वाले समय में उसके और भी दुष्परिणाम देखने को मिलेंगे। कहा कि आज से 100 साल पहले संस्कृति क्या थी। अभी के समय में अपराध की घटना बढ़ती जा रही है। 20 साल पहले ऐसी स्थिति नहीं थी।

सत्य पराजित नहीं होता

भगवान के अपने धाम लौटने के साथ ही कलयुग शुरू हो गया और कलयुग में अपने अत्याचार करने शुरू कर दिए। कलयुग ने बल रूपी धर्म को मारा तो धर्म के तीन पैर टूट गए, लेकिन सत्य पर जो पैर था, वह नहीं टूटा। सत्य को पराजित नहीं किया जा सकता। जब बुद्धि भगवान में लग जाए और भगवान बुद्धि का वरण कर लें, तो समझ लेना की मनुष्य को ज्ञान की प्राप्ति हो गई है।