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लकड़ी के बक्से बंद कर नवजात को गंगा में बहाया, चुनरी में लिपटी मासूम के साथ रखी थी….😱

जरा हटके

कहते हैं ‘जाकौ राखे साइयां, मार सकै न कोय’… कुछ ऐसी ही कहानी बयां करती एक खबर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से निकलकर सामने आई है, जिसे सुनकर कर किसी का दिल द’हल जाएगा। यहां गंगा नदी में बहते एक लकड़ी के बक्से में 21 दिन की मासूम बच्ची मिली है।

चुनरी में लिपटी थी नवजात
बता दें कि मा’म’ला सदर कोतवाली क्षेत्र के ददरी घाट का है। बताया जा रहा है कि ददरी घाट पर गंगा किनारे एक लकड़ी के बॉक्स से एक नाविक ने किसी बच्चे की रोने की आवाज सुनी। उसने पास जाकर देखा तो लकड़ी के बॉक्स के अंदर से किसी बच्चे के रोने की आवाज आ रही थी, तब तक घा’ट पर मौजूद कुछ लोग भी जुट गए। लोगों ने बॉक्स को खोला तो दंग रह गए। लकड़ी के बॉक्स में चुनरी में लिपटी एक मा’सूम बच्ची थी, जो रो रही थी। है’रत की बात यह थी कि बॉक्स में देवी दुर्गा का चित्र भी चिपका हुआ था साथ ही एक जन्मकुंडली भी थी, जो शायद बच्ची की हो। जन्मकुंडली में बच्ची का नाम गंगा लिखा है।

बताया जा रहा है कि गाजीपुर के सदर कोतवाली इ’ला’के के ददरी घाट के किनारे गंगा में बहते बक्से से बच्ची के रोने की आवाज आ रही थी। आवाज सुनकर जब एक नाविक ने उसे खोला तो वह हैरान रहा गया। बक्‍से में देवी-देवताओं के फोटो और जन्मकुंडली के साथ एक मासूम बच्ची चुनरी में लिपटी थी। इसके बाद पु’लि’स को इसकी सूचना दी गई। पुलिस ने ला”वा’रिश बच्ची को आशा ज्योति केंद्र पहुंचाया है और जां’च में जुटी है।

मासूम बच्ची पूरी तरह स्वस्थ
बताया जा रहा है कि लकड़ी के बॉक्स में मिली मासूम को नाविक अपने घर ले गया। उसके परिजन बच्ची को पालना चाहते थे, लेकिन स्थानीय लोगों ने मा’मले की सूचना पु’लि’स को दी। सूचना पर पु’लि’स टीम नाविक के घर पहुंची और बच्ची को आशा ज्योति केंद्र ले गयी, जहां मासूम का पालन पोषण किया जा रहा है। मासूम बच्ची पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित बतायी जा रही है।