Categories
धर्म

गरुण पुराण : महापाप माने जाते हैं व्यक्ति के ऐसे कर्म, मरने के बाद होती है दुर्गति……..

धार्मिक खबर

कहा जाता है कि जीवन में अच्छे कर्म ही किए जाने चाहिए क्योंकि बुरे कर्मों का फल मृ’त्यु के बाद न’र्क में दं’ड भो’गना पड़ता है. हा’लांकि ये स्वर्ग और न’र्क क्या है, ये किसी ने नहीं देखा. लेकिन गरुड़ पुराण में स्वर्ग और न’र्क के बारे में बताया गया है. गरुड़ पुराण के मुता’बिक मृ’त्यु के पश्चात इंसान के क’र्मो के हि’साब से उसे स्वर्ग या फिर न’र्क में भेजा जाता है. वहां उसे दं’ड भोग’ना पड़ता है.

इसके बाद ही उसकी यो’नि का निर्धारण किया जाता है. गरुड़ पुराण को सना’तन धर्म के 18 महापुराणों में से एक माना गया है. इस महापुराण में व्यक्ति को धर्म और भ’क्ति के मा’र्ग पर चलकर सदा’चारी जीवन जीने की शिक्षा दी गई है और लोक-पर’लोक की बातें की गई हैं.

साथ ही कुछ ऐसे कामों के बारे में बताया गया है, जो कभी नहीं करने चाहिए वर्ना व्यक्ति को सबसे भया’नक प्रेत यो’नि में जन्म लेना पड़ता है.

माता-पिता का अपमान

माता-पिता को सनातन धर्म में पूज्यनीय माना गया है. उन्हें पूरी सृष्टि में सर्वोच्च स्थान दिया गया है. जो व्यक्ति अपने माता-पिता का अपमान करते हैं, उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हैं या उन्हें सताते हैं, ऐसे लोगों को महा’पाप का भागीदार माना जाता है. मृ’त्यु के बाद ऐसे लोगों को प्रेत यो’नि में जन्म लेना पड़ता है.

लालच और छल

गरुड़ पुराण में लालच और छल को महा’पाप की श्रेणी में रखा गया है. लालच में आकर ही व्यक्ति गल’त काम करता है, दूसरों के साथ छ’ल से उसकी चीजों को हड़प’ता है और लोगों का अहित करता है. ऐसे लोगों को प्रेत यो’नि में जन्म लेना पड़ता है.

चोरी-चकारी

चोरी करके किसी के हक की चीज लेने को भी महापा’प माना गया है. ऐसे लोगों को भी प्रेत यो’नि में डाला जाता है. इसको लेकर गरुड़ पुराण में उदाहरण के तौ’र पर एक कहानी का भी जि’क्र किया गया है.

श्राद्ध के समय की गई गलती

श्राद्ध करते समय हमेशा ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद ही खुद भोजन ग्रहण करना चाहिए. अगर आप पहले से भोजन कर लेते हैं तो इसे महा’पाप की श्रेणी में रखा जाता है. ऐसी गल’ती करने पर श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को प्रेत यो’नि में जन्म लेना पड़ सकता है. इसके अ’लावा श्रा’द्ध करते समय साफ-सफाई और शुद्धता का पूरा ख’याल रखना चाहिए.