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तो इसलिए नहीं सड़ता गंगा का पानी, वैज्ञानिकों ने भी माना गंगा का चमत्कार..

धार्मिक ख़बर

:- पानी हमारी जिंदगी में एक अहम भूमिका निभाती है। बिन पानी सब सून क्योंकि बिना पानी पीए इंसान ज्यादा दिनों तक जीवित नहीं रह सकता।अच्छे स्वास्थ्य के लिए भी पानी का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए। हमेशा स्वच्छ और ताजे पानी का ही प्रयोग करना चाहिए। ज्यादा दिन तक रखे पानी का उपयोग न ही करें तो बेहतर है क्योंकि पानी को ज्यादा लंबे समय तक रखने से उनमें कीड़े आने लगते हैं।

वैज्ञानिकों ने किया खुलासा इस वजह से कभी नहीं सड़ता गंगा का पानी, सच्चाई आपको भी कर देगी हैरान

इसीलिए पानी को समय-समय पर चेंज करते रहना चाहिए, लेकिन आज हम उस पानी की बात करेंगे जो कभी खराब नहीं होता है। आप चाहें इस पानी को कितने भी दिनों तक स्टोर करके रख लें पर ना तो इसका रंग परिवर्तन होगा और ना ही इससे कोई बदबू या गंध आएगी।

आप समझ ही गए होंगे कि हम यहां गंगा जल की बात कर रहे हैं। यह नदी इस हद तक पवित्र है कि इसका पानी कभी भी खराब नहीं होता है। धार्मिक दृष्टिकोण से गंगा जल के महत्व के बारे में हम सभी जानते हैं। पुण्य प्राप्ति के लिए इंसान इस नदी में सदियों से स्नान करता आ रहा है।

प्रत्येक शुभ कार्य में गंगा जल का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाता है। गंगाजल में मृत शरीर से लेकर शहरों के कचरे तक बहते हैं, लेकिन इसके बावजूद इसकी पवित्रता पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। सालों बाद भी इस नदी का पानी वैसे ही बना रहता है जबकि सामान्य जल तो कुछ ही दिनों में खराब हो जाता है।

क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सदियों से इसका जल इतना पवित्र कैसे है? आखिर क्या है इसके पीछे की वजह? आज हम धर्म या आध्यात्मिक दृष्टिकोण की बात नहीं करेंगे बल्कि इसके पीछे की वैज्ञानिक कारणों का जिक्र करेंगे।

कुछ समय पहले वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध में इस बात का खुलासा किया गया था। शोध के निष्कर्षो के अनुसार गंगा जल के कभी भी खराब ना होने के पीछे एक वायरस का हाथ है। वैज्ञानिकों के अनुसार, गंगाजल में एक वायरस पाया जाता है जिस कारण यह कभी भी सड़ता नही है। आप चाहें तो इसे सालों या सदियों तक रख दें, लेकिन इसमें कोई परिवर्तन नहीं आएगा।


जानकारी के लिए बता दें, इस शोध की शुरूआत सन 1890 में अर्नेस्ट हैंकिन ने की थी जो एक ब्रिटिश साइंटिस्ट थे। दरअसल, उस दौरान भारत में लोगों को हैजा की बीमारी हो रही थी। जिनकी मौत हो जाती थी उन लोगों की लाशों को गंगा नदी में ही फेंक दिया जाता था। हैंकिन को इस बात की चिंता सता रही थी कि कहीं गंगा में नहाने से लोगों को हैजा न हो जाए।

इसी भय के चलते जब हैंकिन ने गंगाजाल पर रिसर्च किया तो परिणाम देखकर वह हैरान रह गया क्योंकि उनके शोध में गंगाजल बिल्कुल ही शुद्ध निकला। हैंकिन के इस शोध को बाद में एक फ्रैंच साइंटिस्ट ने आगे बढ़ाया। उन्होंने भी शोध में पाया कि गंगाजल में पाए जाने वाले वायरस हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म कर देते हैं। इस वायरस को नए वैज्ञानिकों ने ‘निंजा वायरस’ का नाम दिया है।