Categories
धार्मिक

दरवाजे के सामने सोने से हो जाती है मौत ,जानिए क्यूं…

धार्मिक

कैसी भी थकान हो या कैसी भी बीमारी हो, पर्याप्त नींद इन समस्याओं का सबसे अच्छा उपाय है। स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है प्रतिदिन पर्याप्त नींद ली जाए। यदि नींद पूरी नहीं हो पाती है तो ये आलस्य को बढ़ाती है और कई बीमारियों का न्यौता देती है। हमें अच्छे से नींद के लाभ मिल सके इसके लिए शास्त्रों में कई प्रकार के नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन पर व्यक्ति को आरामदायक नींद आती है।

आज हम आपको बताएंगे कि किस दिशा में सोना चाहिए और किस दिशा की तरफ सिर और किस दिशा में पैर करने चाहिए और गलत दिशा में सोने पर क्या नकारात्मक प्रभाव हो सकते है।

वैसे सोने के तरीकों के बारे में अगर आप जानना चाहते हैं तो उससे पहले ये जान लें कि फेंग शुई के अनुसार कभी भी दरवाजे के सामने नहीं सोना चाहिए। यह मौत का परिचायक माना जाता है। यही वजह है कि चीन में मृत व्यक्ति के शव को दरवाजे पर ही रखा जाता है। इस बात से आप समझ सकते हैं कि आखिर क्यों नींद को लेकर वास्तु से लेकर फेंगशुई तक में कई बातों का ध्यान रखने को कहा गया है।

इस बारे में हमने बात की पं. जगदीश शर्मा से जिन्होंने बताया कि नींद के संबंध में सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि हम लेटे कैसे? हमारा सिर और पैर किस दिशा में होना चाहिए? यदि इन बातों का ध्यान रखा जाए तो व्यक्ति को गहरी और अच्छी नींद प्राप्त होती है। सोने की सही अवस्था व्यक्ति को काफी ऊर्जा प्रदान करती है। गलत अवस्था में सोने पर कई प्रकार की बीमारियां होने की संभावनाएं रहती हैं। उससे पहले ये जानना भी जरूरी है कि किस दिशा में सोना मनुष्य के लिए सबसे बेहतर होता है।

इन दिशाओं में सोने से पड़ता है ये फर्क

दक्षिण दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण दिशा में यमलोक स्थित है और यदि आप सोते समय अपने पाँव दक्षिण दिशा की ओर कर के सोते हैं तो इसका मतलब है कि आप यमलोक की ओर जा रहे हैं।इसलिए दक्षिण दिशा को नकारात्मक ऊर्जा की दृष्टि से देखा जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो उत्तर और दक्षिणी ध्रुव जब मिलते है तो वहाँ चुम्बकीय ऊर्जा प्रवाहमान होती है। इसीलिए उत्तरसे दक्षिणी दिशा की ओर चुम्बकीय ऊर्जा विद्यमान होती है।

दक्षिण दिशा की ओर पैर करके सोने से हमारे शरीर में चुम्बकीय ऊर्जा प्रवाहित होती है और जब हम सुबह उठते है तो शरीर को थका थका सा महसूस होता है। शारीरिक ऊर्जा क्षीण हो जाती है जबकि दक्षिण दिशा ओर सिर रखकर सोने से इस तरह की कोई अनुभूति नही होती।

पश्चिम दिशा
पश्चिम दिशा की ओर सिर रखकर नही सोना चाहिए। वास्तुशास्त्र के अनुसार पूर्व दिशा में सूर्य देव और अन्य सभी देवी-देवताओ का वास होता है। यदि हम पश्चिम दिशा में सिर रखकर सोयेंगे तो पूर्व दिशा की ओर हमारे पैर होंगे और देवी-देवताओ की ओर पैर करके सोना अशुभ माना गया है जिससे नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पश्चिम दिशा की ओर सिर रखकर सोने से बुरे बुरे सपने आते है और मन में बेचैनी रहती है। अतः पश्चिम दिशा की ओर सिर रखकर कभी नही सोना चाहिए।

उत्तर दिशा
वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार उत्तर दिशा में धनात्मक या सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है। चूँकि हमारे सिर में भी धनात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और पैरो से ऋणात्मक ऊर्जा का निकास होता है।यह भी दिशा बताने वाले चुम्बक के नियम के समान कार्य करता है कि धनात्मक प्रवाह वाले आपस में मिल नहीं सकते।

यदि हम अपने सिर को उत्तर दिशा की ओर रखेंगे तो उत्तर दिशा की धनात्मक शक्ति और सिर की धनात्मक तरंग एक दूसरे से विपरित भागेगी जिससे हमारे मस्तिष्क में बेचैनी बढ़ जाएगी और फिर नींद अच्छे से नहीं आएगी।

पूर्व दिशा
पूर्व दिशा वास्तु के अनुसार सोने के लिए बहुत अच्छी मानी गयी है। पूर्व दिशा की ओर सिर करके सोने से ध्यान,एकाग्रता,आध्यात्मिकता और स्मृति में वृद्धि होती है। एक विद्यार्थी के लिए तो पूर्व दिशा में सिर रखकर सोना बहुत ही गुणकारी माना गया है। अतः पूर्व दिशा की ओर सिर रखकर सोना सबसे लाभप्रद माना गया है।

इन बातों का भी रखें ध्यान
शाम के समय न सोएं
शास्त्रों में संध्या के वक्त, खासकर गोधूलि बेला में सोने की मनाही है। ऐसा इसलिए क्योंकि मान्यताओं के मुताबिक शाम के वक्त घर में लक्ष्मी का प्रवेश होता है। और शास्त्रों के अनुसार जो लोग ऐसे समय में सोते हैं, वे निर्धन बने रहते हैं।

खाने के तुरंत बाद न सोएं
सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक मान्यताएं भी यही कहती हैं कि सोने से करीब 2 घंटे पहले ही भोजन कर लेना चाहिए। सोने से ठीक पहले कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए या भोजन के तुरंत बाद नहीं सोना चाहिए। इससे शरीर पर बुरा असर पड़ता है।

मन को रखें शांत
अगर बहुत जरूरी काम न हो तो रात में देर तक नहीं जागना चाहिए। साथ ही जहां तक संभव हो, सोने से पहले मन को शांत रखने की कोशि‍श करनी चाहिए।

शास्त्रों में नींद से जुड़ी कुछ खास बातें

  • शास्त्रों में संध्या के वक्त, खासकर गोधूलि बेला में सोने की मनाही है।
  • सोने से करीब 2 घंटे पहले ही भोजन कर लेना चाहिए।
  • सोने से ठीक पहले कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए।
  • अगर बहुत जरूरी काम न हो तो रात में देर तक नहीं जागना चाहिए।
  • जहां तक संभव हो, सोने से पहले चित्त शांत रखने की कोशि‍श करनी चाहिए।
  • सोने से पहले प्रभु का स्मरण करना चाहिए और इस अनमोल जीवन के लिए उनके प्रति आभार जताना चाहिए।