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पूजा-पाठ में इन चीजों को कभी नहीं माना जाता बासी, कई बार कर सकते हैं प्रयोग…….

धार्मिक खबर

पूजा-पाठ करने से कई तरह के नियम जुड़े हुए हैं और इन नियमों का पालन करते हुए जो पूजा की जाती है, केवल उसे ही सफल माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार पूजा करते हुए हमेशा खड़े होकर आरती करनी चाहिए। अगरबत्ती की जगह कपूर या दीपक का प्रयोग करना चाहिए। हमेशा नहाने व साफ वस्त्र धारण करने के बाद ही पूजा की जाती है। इन नियमों के अनुसार की गई ही पूजा सफल मानी होती है।

शास्त्रों के अनुसार बासा जल, पत्ते व फूलों का प्रयोग पूजा के दौरान नहीं करना चाहिए। इन बासी चीजों को भगवान को अर्पित करना वर्जित माना गया है। हालांकि पूजा के दौरान कुछ ऐसी चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है जो कि कभी भी खराब नहीं मानी जाती है। शास्त्रों में इन चीजों को बासा नहीं माना गया है। तो आइए जानते हैं इन वस्तुओं के बारे में।

गंगाजल

शास्त्रों के मुताबिक पूजा में कभी भी बासी जल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। भगवान को हमेशा शुद्ध व ताज जल ही अर्पित किया जाता है। हालांकि गंगाजल को शास्त्रों में बास नहीं माना गया है। ये जल कितना भी पुराना क्यों न हो जाए इसका प्रयोग पूजा करते हुए किया जा सकता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सालों पुराना गंगाजल खराब नहीं होता है। इसका इस्तेमाल पूजा में किया जा सकता है। ये जल हमेशा पवित्र ही रहता है।

बेलपत्र

शिव जी की पूजा करते हुए बेलपत्र का इस्तेमाल जरूर किया जाता है। बेलपत्र शिव जी को बेहद ही प्रिय है और इसका इस्तेमाल पूजा के दौरान करने से शिव जी प्रसन्न हो जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र चढ़ाया जाता है और बेलपत्र को एक बार चढ़ाने के बाद दोबारा भी धोकर चढ़ाया जाता है।

कमल का फूल

पूजा- पाठ में हमेशा ताजे फूलों का ही प्रयोग करना चाहिए। मान्यता है कि फूल चढ़ाने से देवी- देवता अधिक प्रसन्न हो जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार पूजा के समय बासी फूल बिल्कुल नहीं चढ़ाने चाहिए। हालांकि कमल का फूल कभी भी बासा नहीं होता है। इसलिए ये पुष्प धोकर दोबारा से पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है। कमल के फूल को तोड़ने के बाद इसका प्रयोग पांच दिन तक किया जा सकता है।

तुलसी के पत्ते

तुलसी के पत्तों के बिना विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। विष्णु जी की पूजा करते हुए तुलसी के पत्तों का प्रयोग जरूर करना चाहिए। तुलसी के पत्ते भी कभी भी बासी नहीं होते हैं। पूजा में पुराने तुलसी के पत्ते का इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है।