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अगर आपके जीवन में आती हैं मुश्किलें, तो आपकी कुण्डली में यहां हो सकता है शनि………….

धार्मिक खबर

व्यक्ति की कुंडली में शनि की दशा तीन बातों पर निर्भर करती है। पहला, शनि आपकी कुंडली में शुभ फलकारक ग्रह है या अकारक। दूसरा, शनि की स्थिति आपकी कुंडली में किस भाव में स्थित है। तीसरा, शनि आपकी कुंडली में बली है या कमजोर। यदि कुंडली में शनि शुभ कारक और मजबूत है, साथ ही सही स्थिति में है तो शनि की दशा भी अच्छे परिणाम देगी। यदि कुंडली में शनि अकारक है तो मध्यम परिणाम मिलेंगे। लेकिन अगर शनि आपके लिए अकारक भी है और शनि की स्थिति भी दुख भाव में है, साथ ही अकारक होने के साथ ही शनि कुंडली में कमजोर है तो ऐसे में शनि की दशा व्यक्ति के जीवन में संघर्ष बढ़ाएगी। शनि अगर शुभ भाव केंद्र त्रिकोण लाभ स्थान आदि में हो, उच्च राशि में हो तो भी शनि की दशा अच्छे परिणाम देती है। लेकिन छठे, आठवें, बारहवें भाव में हो, सूर्य से अस्त हो अथवा नीच राशि में हो तो शनि की दशा जीवन में संघर्ष बढ़ाती है। सामान्यत: वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न वालों के लिए शनि की दशा शुभ फल देती है जबकि मेष, वृश्चिक के लिए मध्यम। कर्क, सिंह, धनु एवं मकर लग्न वालों के लिए शनि की दशा संघर्ष बढाती है।   

संघर्ष बढ़े तो यह करें उपाय
-ऊं शम शनैश्चाय नम: की एक माला रोज जाप करें। 
-शनिवार की शाम पीपल पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं। 
-गरीब, वृद्ध और विकलांग लोगों की सेवा करें। 
(ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)