Categories
Other

श्री गणेश को बुधवार के दिन ऐसे करें प्रसन्न और पाएं मनचाहा आशीर्वाद

सनातन हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य देव माना गया है। वहीं आदि पंच देवों में भी ये एक प्रमुख देव माने गए हैं। हनुमान जी की ही तरह श्री गणेश को भी कलयुग का प्रमुख देवता माना जाता है, ऐसे में हर कोई श्री गणेश जी को प्रसन्न कर उनसे मनचाहा वरदान मांगना चाहता है

ज्योतिष के अनुसार ग्रहों में श्री गणेश को बुध का स्वामित्व प्राप्त है। बुध को बुद्धि का कारक माना गया है, वहीं श्री गणेश रिद्धि सिद्धि के दाता माने गए हैं। ऐसे में सप्ताह के वारों में इन्हें बुधवार का कारक देव माना गया है, मान्यता है कि इस दिन श्री गणेश अत्यंत आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं।

दरअसल एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, कैलाश पर्वत पर जिस समय माता पार्वती के द्वारा गणेश जी की उत्पत्ति हुई थी, तो उस समय बुध देव भी वहां उपस्थित थे। इसलिए तभी से बुध को गणेशजी का प्रमुख वार माना गया। ऐसे में आज हम आपको बुधवार के दिन श्री गणेश की पूजा कैसे करें, इस संबंध में बता रहे हैं।

श्री गणेश प्रथम पूज्य व विघ्नों को हरने वाले हैं। वहीं श्री गणेश की पूजा के लिए बुधवार का दिन सबसे उचित माना जाता है।

श्री गणेश की पूजा विधि:

श्री गणेश के पूजन से पहले नित्यादि क्रियाओं से निवृत्त होकर शुद्ध पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। इसके साथ ही पूजन सामग्री को जैसे पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि एकत्रित कर लें।

इसके बाद सामने श्री गणेश के लिए एक चौकी स्थापित करें, जिस पर लाला कपड़ा बिछा दें। उस पर श्री गणेश की प्रतिमा यानि मूर्ति विराजमान कर दे। यदि मूर्ति नहीं है तो एक पात्र में (छोटी प्लेट) सुपारी पर लाल कलावा लपेटकर चावलों के उपर स्थापित कर दें, बस भगवान श्री गणेश यहां साकार रूप में उपस्थिति हो गए।

पूजा करते समय गणेशजी को उनके प्रिय बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं।

भोग लगाते समय : मंत्र…
नैवेद्यं गृह्यतां देव भक्तिं मे ह्यचलां कुरू,
ईप्सितं मे वरं देहि परत्र च परां गरतिम्,
शर्कराखण्डखाद्यानि दधिक्षीरघृतानि च,
आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद।

घर में क्लेश आदि हो तो गणेशजी की सफेद प्रतिमा स्थापित करें और सफेद मोदक का भोग लगाएं।

पूजन शुरू करने से पहले घी का दीपक जलाकर उसे चौकी के दाहिने भाग में थोड़े से चावलों के उपर रख दें। ॐ दीपज्योतिषे नम: कहकर दीपक पर रोली का छींटा देकर एक पुष्प चढ़ा दें और मन में प्रार्थना करें कि हे दीप! आप देव रूप मेरी पूजा के साक्षी हों, जब तक मेरी पूजा समाप्त न हो जाए, तब तक आप यहीं स्थिर रहना।

दीपक प्रज्वलित करते समय : मंत्र…
साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया,
दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम्,
भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने,
त्राहि मां निरयाद् घोरद्दीपज्योत।

ध्यान रहे भगवान श्रीगणेश शुद्ध स्थान से चुनी हुई दुर्वा को धोकर ही चढ़ाना चाहिए। इन्हें कभी भी तुलसी दल व तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए।

अब हाथ में पुष्प, दूर्वा व अक्षत लेकर श्री गणेश जी का ध्यान करें-

गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफल चारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्।।

फूल व पुष्पमाला अर्पित करते समय : मंत्र…
माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो,
मयाहृतानि पुष्पाणि गृह्यन्तां पूजनाय भोः।

इसके बाद श्री गणेश के विभिन्न नामों के साथ सभी सामग्री उन्हें अर्पित करें। इससे पूजा के साथ श्री गणेश के विभिन्न नामों के उच्चारण का फल भी मिलेगा।

मान्यता के अनुसार श्रीगणेश के दिव्य मंत्र ॐ श्री गं गणपतये नम: का 108 बार जप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।