Categories
News Other

PM मोदी नें खुद सुनायी यें Good News , जानकर हो जाओगें खुश!!😍😀

खबरें

देश में शेरों की संख्या 29 फीसदी बढ़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ट्वीट करके इसकी जानकारी दी। उन्होंने शेरों की तस्वीरों के साथ ट्वीट किया, ‘गुजरात के गिर फोरेस्ट में रहने वाले एशियाई शेरों की आबादी करीब 29 फीसदी बढ़ी है। उनके रहने का दायरा भी 36 फीसदी बढ़ा है। इसके लिए गुजरात के लोग और वे सभी लोग बधाई के पात्र हैं जिनके प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई है।’

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से गुजरात में शेरों की संख्या लगातार बढ़ी है। यह जन सहभागिता, तकनीक के इस्तेमाल, वन्यजीवों के स्वास्थ्य की देखभाल, उचित पर्यावास प्रबंधन और मनुष्य तथा शेरों के बीच टकराव को कम के कम करने के प्रयासों का नतीजा है। उम्मीद है कि यह सकारात्मक रुझान जारी रहेगा।

एशियाई शेरों का एकमात्र ठिकाना
एशियाई शेरों के लिए मशहूर गिर नेशनल पार्क 412 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। पिछले कई वर्षों से गुजरात सरकार और वन विभाग शेरों के संरक्षण को लेकर यहां पर काम कर रहे हैं। यही वजह है कि यहां पिछले कुछ सालों में शेरों की संख्या बढ़ी है। गिर जंगल देश में एशियाई शेरों का एकमात्र ठिकाना है।

गुजरात के वन विभाग ने बुधवार को बताया कि गिर वन क्षेत्र में एशियाई शेरों की संख्या 29 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अब 674 हो गई है। विभाग ने 5 और 6 जून को पूर्णिमा में शेरों की संभावित संख्या की गणना शुरू की थी। हर पांच साल बाद होने वाली यह गणना मई में होनी थी, लेकिन लॉकडाउन के चलते इसे टाल दिया गया। मई 2015 की गणना के अनुसार गिर में एशियाई शेरों की संख्या 523 थी। 2010 से 2015 के बीच इनकी संख्या में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

कुनबे के साथ इलाका भी बढ़ा
विभाग की आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया है कि ‘पूनम अवलोकन’ (पूर्णिमा पर शेरों की गिनती की कवायद) में पता चला है कि शेरों की संख्या 28.87 प्रतिशत बढ़कर 674 हो गई है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह अब तक की सबसे अधिक वृद्धि दर है। कुल 674 शेरों में 161 नर, 260 मादा, 116 व्यस्क शावक और 137 शावक हैं। इस कवायद में यह भी पता चला है कि शेरों के इलाके में भी 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 2015 के 22,000 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2020 में 30,000 वर्ग किलोमीटर हो गया है।

शेरों की गणना की इस कवायद में 1,400 कर्मी शामिल थे। हालांकि इस बीच कई शेरों की मौत भी हुई है। अधिकारियों के अनुसार टिक (किलनी) जनित बीमारी ‘बेबसियोसिस’ के चलते बीते तीन महीने में क्षेत्र में करीब दो दर्जन शेरों की मौत हुई है। इससे पहले अक्टूबर-नवंबर 2018 में कैनाइन डिस्टेम्पर वायरस (सीडीवी) के चलते 40 शेरों की मौत हो गई थी।