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ज्योतिष: कुंडली में ये योग भंग कर देते हैं राजयोग के प्रभाव, देते हैं भयंकर कष्ट

जन्म कुंडली में सामान्यतः ज्यादातर राजयोगों की ही चर्चा होती है। कई बार ज्योतिषी कुछ दुर्योगों को नजरअंदाज कर जाते हैं जिस कारण राजयोग फलित नहीं होते और जातक को ज्योतिष विद्या पर संशय होता है परन्तु कुछ ऐसे दुर्योग हैं जिनके प्रभाव से जातक कई राजयोगों से लाभांवित होने से चूक जाते हैं।

ग्रहण योग

कुंडली में कहीं भी सूर्य अथवा चन्द्रमा की युति राहु या केतु से हो जाती है तो इस दोष का निर्माण होता है। यदि यह योग चन्द्रमा के साथ बना तो जातक हमेशा डर व घबराहट महसूस करता है और चिड़चिड़ापन उसके स्वभाव का हिस्सा बन जाता है। साथ ही मां के सुख में कमी, किसी भी कार्य को शुरू करने के बाद उसे अधूरा छोड़ देना व नए काम के बारे में सोचना इस योग के लक्षण हैं। किसी भी प्रकार के फोबिया अथवा किसी भी मानसिक बीमारी जैसे डिप्रेशन, सिज्रेफेनिया आदि इसी योग के कारण माने गये हैं। यदि चन्द्रमा अधिक दूषित हो जाता है तो मिर्गी, चक्कर व मानसिक संतुलन खोने का डर भी होता है। 

वहीं सूर्य द्वारा बनने वाला ग्रहण योग पिता के सुख में कमी करता है। जातक का शारीरिक ढांचा कमजोर हो जाता है। आंखों व हृदय संबंधी रोगों का कारक बनता है।

गुरु चांडाल दोष

गुरु की किसी भाव में राहु से युति चंडाल योग बनाती है। शरीर पर घाव का चिन्ह लिए ऐसा जातक भाग्यहीन होता है। आजीविका से जातक कभी संतुष्ट नहीं होता, बोलने में अपनी शक्ति व्यर्थ करता है व अपने सामने औरों को ज्ञान में कम आंकता है जिस कारण स्वयं धोखे में रहकर पिछड़ जाता है। यह योग जिस भी भाव में बनता है उस भाव को साधारण कोटि का बना देता है।

दरिद्र योग
लग्न या चन्द्रमा से चारों केन्द्र स्थान खाली हों या चारों केन्द्रों में पाप ग्रह हों तो दरिद्र योग बनता है। ऐसा जातक अरबपति के घर में जन्म में भी ले ले तो भी उसे आजीविका के लिए भटकना पड़ता है व दरिद्र जीवन बिताने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

शकट योग

चन्द्रमा से छठे या आठवें भाव में गुरु हो व ऐसा गुरु लग्न से केंद्र में न बैठा हो तो शकट योग का होना माना जाता है। ऐसा जातक जीवन भर किसी न किसी कर्ज से दबा रहता है व सगे संबंधी उपेक्षा करते हैं और जातक अपने जीवन में अनगिनत उतार चढ़ाव देखता है।

कलह योग

यदि चन्द्रमा पाप ग्रह के साथ राहु से युक्त हो 12वें, 5वें या 8वें भाव में हो तो कलह योग माना गया है। ऐसा जातक जीवन भर किसी न किसी बात को लेकर कलह करता रहता है और अंत में इसी कलह के कारण तनाव में उसका जीवन तक नष्ट हो जाता है।